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विश्व के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश के आज रास्ट्रपति का चुनाव संपन्न हुआ लेकिन इसने बहुत सारे प्रश्न छोड दिये हैं। जिस प्रकार से हमारे देश की राजनीतिक पार्टियों ने इसमें हिस्सा लिया और जिस प्रकार से देश के अंदर अल्पसंख्यक और दलित के ऊपर लगातार हमले हुए उसने कहीं न कहीं एक राष्ट्रपति के चुनाव को प्रमुखता के शिखर पर लाकर खड़ा कर दिया था। यही कारण था कि सत्ता पक्ष को मजबूरन एक दलित उम्मीदवार लाना पड़ा। सवाल यहाँ यह उत्पन्न होता है कि क्या जति देश के सबसे बड़े पद से भी ज्यादा ऊँची हो गई?
😢
बड़ी विडंबना है कि आज जब देश नई ऊंचाई प्राप्त कर आगे बढ रहा है उसी के साथ साथ देश के अंदर जाति तथा साम्प्रदायिक तनाव की समस्या बढ़ती जा रही है। इतनी विविधता के साथ जब देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है तब कुछ सरारती तत्व आग को भड़का रहे है। यह केवल कुछ लोग या एक पार्टी की बात नही है कि वह सत्ता में है इसलिए ये सब मुद्दे आज बढ़ गए हैं। ये सारी समस्याएं पहले भी थी परन्तु इतनी जटिल नही थीं। फिर आज क्यों यह इतनी जटिल हो गई?
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे सरकार का नरम रुख आदि इत्यादि...। 
      यह हमारे देश की संस्कृति है कि शदियों से हम सब एक साथ रहते आ रहे है और एक दूसरे के साथ मिल बांट कर जिंदगी जी रहे हैं। एक विशेष सम्प्रदाय यदि अपने आप को सर्वश्रेष्ठ समझने लगा तो वह देश की संस्कृति , भाईचारे के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। अतः सभी को यह जरूर सोचना चाहिए कि क्या वह बिना एक दूसरे के सहयोग के अपनी जिंदगी सुचारू रुप से चला सकते हैं।

                        सलमान अली
              

Comments

  1. Great enthusiasm .....keep it up

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  2. जी अनुराग भाई सुरुआत है अभी।

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